भारत में पांच वर्षों में साइबर अपराध में 457% की हुई बढ़ोत्तरी–एसोचेम-एनईसी संयुक्त अध्ययन

विकल्प न्यूज डेस्क,

नई दिल्ली, 9 जनवरी, 2019: हाल ही में एसोचेम एवं एनईसी के संयुक्त अध्ययन में यह कहा गया है कि भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम,2000  के तहत 2011 से 2016 के बीच साइबर अपराध की घटनाओं में 457 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

2012 से 2017 के बीच, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 44 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी, जिसके कारण भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में तीसरा स्थान दिया गया है।

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचेम) एवं एनईसी  द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘डिजिटल पुलिसिंग- पब्लिक पुलिस के लिए स्मार्ट पुलिसिंग,’ शीर्षक के अध्ययन का उल्लेख करते हुए सिमेन्टेक कॉर्प ने साइबर अपराध से प्रभावित होने वाले शीर्ष 5 देशों में भारत को स्थान दिया है।

अध्ययन के अनुसार साइबर अपराधों से निपटने और साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन उत्पीड़न के बढ़ते खतरे को संभालने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पूरे अधिकार क्षेत्र में केंद्रीय साइबर सेल, जिला साइबर सेल और पुलिस स्टेशन साइबर टीमों से मिलकर एक मजबूत संरचना का जिक्र किया गया है। 

संदिग्ध / अपराधियों की पहचान करने और पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिटिक्स, फेशियल रिकॉग्निशन,  आदि जैसी नवीनतम तकनीकों का उपयोग करते हुए, विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बहुत जागरूकता आई है। हालाँकि, इन तकनीकों का कार्यान्वयन एक राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक राज्य स्तर पर है, जो केंद्र सरकार के लिए राज्य स्तर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उनके पुलिसिंग विधियों को अपग्रेड करने के लिए प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए निधि और समर्थन के लिए बहुत महत्वपूर्ण बनाता है, संयुक्त अध्ययन में इस सारी बिंदुओं का उल्लेख किया है।

भारत सरकार और कई कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने बढ़ते साइबर अपराध पर अंकुश लगाने का बीड़ा उठाया है। साइबर लैब स्थापित करने और अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के अलावा, साइबर अपराध का पता लगाने और हल करने के संदर्भ में अतिरिक्त विकास को कानून के प्रवर्तकों के वर्तमान शस्त्रागार में जोड़ना होगा।

इस संयुक्त अध्ययन में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि नई पुलिस तकनीकों को लागू करने से व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जो व्यक्तिगत और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में सहायक होगी। यह अपराध से लड़ने, सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा करने, व्यवसायों और नागरिकों पर बोझ कम करने और शुरुआती हस्तक्षेप के माध्यम से सामाजिक बहिष्कार से निपटने में मदद करेगा।

अपराध, दुनिया भर में हो रहे तकनीकी विकास से मेल खाने के लिए खुद को बदल रहा है। कंप्यूटर और इंटरनेट के अविष्कार के बाद से, अपराध इसके भौतिक संस्करण से डिजिटल तक विकसित हुआ है। 2000 में भारत में आईटी अधिनियम का परिचय, एवं 2008  में संशोधन, वह मोड़ था जहाँ भारत सरकार ने अपराधों के डिजिटल पक्ष यानी साइबर अपराध पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी।

भारतीय पुलिस लगातार साइबर क्राइम से लड़ रही है और उसने ऐसा करने के लिए कई पहल (साइबर क्राइम लैब, रिस्पांस सेंटर, साइबर फॉरेंसिक लैब आदि) की शुरुआत की है।

इसका मुकाबला करने के लिए, राज्य सरकार और राज्य पुलिस केंद्र सरकार और निजी संगठनों की मदद से लगातार नए साइबर विरोधी अपराध उपायों को विकसित कर रहे हैं। साइबर अपराधों की पहचान करने और सुलझाने के क्षेत्र में पुलिस अधिकारियों की इन पहलों, प्रशिक्षण और विकास के अलावा, नवीनतम आपराधिक गतिविधियों और इससे निपटने के लिए आवश्यक तरीकों के बारे में पुलिस को अद्यतन(अप टू डेट) रखने के लिए आवश्यक बना दिया गया है।

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